अपमान
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मनुष्य बनने की कोशिशों के बीच
मुझे पीना पड़ता है अक्सर
अपमान का विष
क्यों कि,
नहीं बन सकता मैं
किसी के जैसा
नहीं कर सकता समझौता
उन चीजों से
जो करता हो आहत
जीवन मूल्यों को
इसलिए बहुतों की उम्मीदों पर
खरा नहीं उतर सका मैं
उनकी दौड़ में
पीछे छूट गया मैं
फिर भी अकेला नहीं हूँ मैं
मेरे पास हैं
मेरे पुरखों की कुछ किताबें
जब भी मैं होता हूँ उदास
वो मुझे देती हैं ऊर्जा
कहती हैं मुझसे --
अपमान से न होना कभी निराश
असीम संभावनाएं
मनुष्य बनने की
हैं तुम्हारे पास ।
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