Thursday, October 3, 2019

कलमकार

कलमकार
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मुझे कलमकार तक ही सीमित रहने दो
और जीवित रहने दो उनके बीच
जिनकी पीड़ा रहती है शामिल
मेरी रचनाओं में । 
मेरी रचनायें गहरी पीड़ा से गुजरकर ही
बंधती हैं छन्दों में
और कहतीं हैं मुझसे--
विषम परिस्थितियों में भी
मत छोड़ना उनका साथ
कभी जो रह गए हैं यात्रा में
सबसे पीछे ।
तभी मैं रह पाऊँगी
निष्पक्ष, मौलिक और प्रासंगिक
इसलिए मुझमें कुछ और मत तलाशो
मैं नहीं हो सकता कभी
अपनी रचनाओं से बड़ा
मुझे यथार्थ की परम्परा का निर्वहन करने दो
मैं कलमकार हूँ
कलमकार ही रहने दो  ।


  -- वेद प्रकाश तिवारी

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