Sunday, September 29, 2019

पहाड़ के सीने पर वार

 पहाड़ के सीने पर वार
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दशरथ मांझी के प्रेम की पराकाष्ठा
बनाती है पहाड़ों में भी रास्ता
वह था बेहद गरीब
बिल्कुल बेसहारा
पर उसके पास थी प्रेम की शक्ति
जिसके आगे हारा
पर्वत सारा
उसने खोया था अपनी पत्नी को
वजह था पहाड़
वह टूट सकता था
बिखर सकता था
जा सकता था छोड़कर गाँव
पर उसके संकल्पों में जिंदा थी फागुनी
जो बनकर उसकी शक्ति
देती थी हिम्मत पहाड़ से टकराने की
22 वर्षों तक वह करता रहा
पहाड़ के सीने पर वार
और चीर कर उसका सीना
बनाई उसमें राह
ताकि भविष्य में जब कोई फागुनी
हो जाए बीमार
तब उसका दशरथ
ना हो विवश और लाचार


---वेद प्रकाश तिवारी

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